UPSSSC 07-परीक्षा/2026: फॉर्म भरना है या 'डिजिटल मजदूरी' करना? बंद करो यह मानसिक प्रताड़ना!

UPSSSC 07-परीक्षा/2026: फॉर्म भरना है या 'डिजिटल मजदूरी' करना?

​आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वन-क्लिक ऑटोमेशन और सुपरफास्ट टेक्नोलॉजी का है। लेकिन अगर आपको देखना हो कि सिस्टम को 'जानबूझकर' कितना घटिया और थकाऊ बनाया जा सकता है, तो उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की वेबसाइट पर चले जाइए।

​हाल ही में आए 07-परीक्षा/2026 के नोटिफिकेशन का फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थी इस समय मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इस वेबसाइट और इसके यूज़र इंटरफेस (UI) को किस महान 'जीनियस' ने डिजाइन किया है?

​एक अभ्यर्थी, एक ही नोटिफिकेशन, लेकिन दस बार मुंशीगीरी!

​इस फॉर्म की सबसे बड़ी और बेवकूफाना विडंबना यह है कि यदि कोई अभ्यर्थी एक ही नोटिफिकेशन के अंतर्गत आने वाले कई अलग-अलग पदों (Posts) के लिए योग्य है और आवेदन करना चाहता है, तो उसे हर पद के लिए नए सिरे से पूरी रामायण टाइप करनी पड़ रही है।

  • वही 10वीं, वही 12वीं, वही ग्रेजुएशन की डिग्रियां!
  • हर पद के लिए अलग से रोल नंबर डालो!
  • हर पद के लिए अलग से मार्कशीट नंबर, सर्टिफिकेट नंबर और जारी होने की तारीख भरो!

​समझ नहीं आता कि जब अभ्यर्थी वही है, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर वही है, तो क्या हर पद के लिए उसकी डिग्रियां और उनके नंबर बदल जाएंगे? यह अभ्यर्थियों से फॉर्म भरवाना नहीं, बल्कि उनसे जबरन 'मैन्युअल मजदूरी' कराना है।

​PET डेटाबेस है या सिर्फ दिखावा?

​आयोग बड़े गर्व से PET (Preliminary Eligibility Test) कराता है ताकि अभ्यर्थियों का पूरा डेटा एक बार में सेव हो सके। जब आपके पास कैंडिडेट का पूरा कच्चा-चिट्ठा पहले से ही सर्वर पर मौजूद है, तो वो डेटा वहां किस काम के लिए रखा हुआ है? क्या डेवलपर्स एक साधारण सा 'कैंडिडेट डैशबोर्ड' नहीं बना सकते थे, जहाँ अभ्यर्थी अपनी योग्यता के अनुसार पदों पर सिर्फ टिक (✓) करे और फॉर्म सबमिट हो जाए?

​'सेशन टाइमआउट' और 'सर्वर क्रैश' का डबल टॉर्चर

​एक तो एक-एक कॉलम को ढूंढ-ढूंढ कर, स्क्रीन पर आँखें गड़ाकर दस बार नंबर टाइप करो, और जैसे ही 'Save' या 'Next' पर क्लिक करो, वैसे ही वेबसाइट अपनी औकात दिखा देती है—"Session Expired" या "504 Gateway Timeout"! पूरी मेहनत पर एक सेकंड में पानी फिर जाता है, डेटा गायब हो जाता है और अभ्यर्थी का ब्लड प्रेशर 180 के पार पहुँच जाता है। छात्र रात के 2-2 बजे तक जागकर सिर्फ इसलिए बैठे हैं कि शायद सर्वर थोड़ा रहम खा जाए।

​यह 'Ease of Applying' नहीं, 'Digital Torture' है!

​बेरोजगार युवा पहले ही समय पर वैकेंसी न आने, पेपर लीक होने और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मानसिक रूप से टूट चुका होता है। जो थोड़ी-बहुत कसर बची थी, उसे आयोग के इस घटिया और कछुआ चाल वाले पोर्टल ने पूरा कर दिया है। पढ़ाई और रिवीजन करने के समय में छात्र यहाँ बैठकर क्लर्क बने हुए हैं।

​सरकारी विभागों और उनके तकनीकी सलाहकारों को समझना होगा कि युवाओं का काम परीक्षा की तैयारी करना है, न कि आपके खराब कोडिंग और घटिया लॉजिक वाले सिस्टम के आगे सिर पटकना। इस सिस्टम में तुरंत सुधार की जरूरत है, वरना यह डिजिटल इंडिया के नाम पर सिर्फ एक मज़ाक बनकर रह जाएगा।

— एक पीड़ित अभ्यर्थी की आवाज़

Comments

Popular posts from this blog

Market Prediction for 9 June: Nifty 50 कल के मुख्य लेवल्स और रणनीति

श्री हनुमान चालीसा

क्रिस्टियानो रोनाल्डो (CR7) जीवनी 2026 | रिकॉर्ड्स, उपलब्धियां और World Cup Journey