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वीआईपी (VIP) दौरा: लोकतंत्र का उत्सव या आम जनता की जेब पर भारी खर्च?

जब भी देश के प्रधानमंत्री या किसी राज्य के मुख्यमंत्री का किसी जिले या क्षेत्र में दौरा होता है, तो पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ जाता है। सड़कों की मरम्मत रातों-रात हो जाती है, सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए जाते हैं, और एक बड़ा सा तामझाम दिखाई देता है। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक बड़ा सवाल हमेशा तैरता रहता है— इस पूरे दौरे में कितना पैसा खर्च होता है और यह पैसा किसकी जेब से जाता है? ​आइए इस पूरे तंत्र, इसके पीछे होने वाले खर्च और इसके बजटीय गणित को विस्तार से समझते हैं। ​1. वीआईपी दौरे में कहाँ-कहाँ खर्च होता है? (खर्च के मुख्य घटक) ​एक मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के दौरे को सफल बनाने के लिए कई विभागों को एक साथ मिलकर काम करना पड़ता है। इसमें होने वाले खर्चों को मुख्य रूप से इन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: ​ सुरक्षा व्यवस्था (Security): यह सबसे बड़ा और सबसे खर्चीला हिस्सा होता है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी SPG (Special Protection Group) के पास होती है, जबकि मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा में स्टेट पुलिस, एंटी-टेरर स्क्वाड (ATS) और केंद्रीय बल तैनात होते हैं। दौरे ...

नगर निगमों का ABC प्रोग्राम: जनता के पैसे की बर्बादी या सिर्फ टेंडर कंपनियों का 'स्कैम' ?

​सड़कों पर घूमते आवारा कुत्ते, आए दिन बच्चों और बुजुर्गों पर होते हमले और हर कोने से आती रेबीज के खतरे की खबरें—यह आज देश के लगभग हर शहर की कड़वी सच्चाई है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगमों द्वारा ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम यानी कुत्तों की नसबंदी का अभियान चलाया जाता है। कागजों पर तो यह योजना बेहतरीन दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह कार्यक्रम सिर्फ "जनता के पैसे की बर्बादी" और "टेंडर लेने वाली कंपनियों के फायदे" का जरिया बनकर रह गया है। ​अगर समय रहते इस व्यवस्था को नहीं सुधारा गया, तो यह सरकारी बजट को डकारने वाला एक बड़ा सफेद हाथी साबित होगा। ​गणित सीधा है: कछुए की रफ्तार से नहीं थमेगी कुत्तों की आबादी ​आइए एक सीधा और व्यावहारिक गणित समझते हैं। एक मादा कुत्ता साल में दो बार बच्चे दे सकती है और एक बार में औसतन 4 से 6 बच्चों को जन्म देती है। इस रफ्तार से शहर में हर साल लाखों नए पिल्ले पैदा हो रहे हैं। ​दूसरी तरफ, हमारे नगर निगम और उनकी टेंडर पाने वाली एजेंसियां साल भर में बमुश्किल 4-5 हजार कुत्तों की सर्जरी कर पाती हैं। जब तक ये एजेंसियां 5...